ध्यान का अभ्यास व्यक्तिगत लाभ और आध्यात्मिक विकास के लिए

Meditation at Center for Spiritual Awareness

ध्यान एक सरल और स्वाभाविक तरीका है जिससे मन को बाहरी स्थितियों से एक चुने हुए ध्यान केंद्र के द्वारा वापस लाकर अपने आप में व्यक्त किया जाता हैं।

नियमित ध्यान अभ्यास के और लाभों का बहुत धर्मनिरपेक्ष समाचार पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में अनेक प्रकार से सूचित किया गया है। ध्यान अभ्यास से मन का तनाव कम, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का मजबूत बनना, बेहतर संगठित सोचना, एकाग्रता में सुधार, मन स्मृति में बढ़ावा, शोधन और तंत्रिका तंत्र के enlivening, पुनर्योजी शक्ति की जागृति, जीवविज्ञान बुढ़ापे की प्रक्रिया का धीमा होना, प्रक्रिया धारणाएं और चेतना के राज्यों के लिए मस्तिष्क की क्षमता, और शरीर के अंगों, ग्रंथियों और सिस्टमस का ठीक रहना होता है। इन कारणों से, बहुत चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्य चिकित्सक नियमित ध्यान के अभ्यास के बारे में राय देते हैं।

हालांकि ध्यान के और लाभों से सुविधा और मज़ा मिलता है, ध्यान के अभ्यास का प्राथमिक उद्देश्य प्रामाणिक आध्यात्मिक विकास है। निम्नलिखित मूल ध्यान प्रक्रिया सीखने और अभ्यास के लिए आसान है।

१ ध्यान दिन में एक या दो बार करें।
२ कमर सीधी रखकर एक कुर्सी पर बैठें। अगर जमीन पर बैठना सुविधाजनक है तो चौकडी मार कर बैठें। सिर ऊंचा रखें, और ध्यान सिर के उपर या मस्तिश्क में आगे की ओर रखें।
३ आराम महसूस करने के लिये एक या दो बार शवास अन्दर लें और बाहर निकालें। कुछ समय के लिये स्थिर रहें जबतक आपको केन्द्रित लगे। अपने प्राकृतिक साँस लेने की ताल से अवगत रहें।

४ जब साँस अन्दर लेना स्वाभाविक लगे, तो मन में एक अपने चुने हुए शब्द जैसे कि "भगवान," "शांति," "आनन्द," या कोई और सुखद शब्द को बोलें। जब साँस छोड़ें तो फिर मन में उसी शब्द को बोलें। यह अनुभव करें कि आपका चुना हुआ शब्द आपके मन में बड रहा है और आपका जागरूकता का क्षेत्र भी बड रहा है। इसे बिना प्रयास के और बिना परिणाम की चिंता से करें।

५ जब मन शान्त हो जाए, तब आप शब्द को सुनना बंद कर दें। मन स्थिर रखें और ध्यान अभ्यास की शान्ति कई मिनट के लिए अनुभव करें, और जब ठीक समझें तो ध्यान समाप्त कर दें।.

यह प्रक्रिया हरेक के लिए उपयुक्त है। केवल आराम का अनुभव करने के लिये, इस प्रक्रिया को लगभग २० मिनट में पूरा किया जा सकता है। यह इक सरल मंत्र ध्यान का तरीका है। मंत्र (संस्कृत मे मन, सोचने कि शक्ति; त्रा जो कि रक्षा के लिए और आगे ले जाए) मन को केंद्रित करने का एक तरीका है जिससे ध्यान तरह-तरह के विचारों और भावनाओं से हटा कर एक ध्यान केंद्र पर लाया जाता है। जब साँस धीमा और परिष्कृत हो जाता है, और जब विचार और भावनाऐं शान्त हो जाती हैं, स्पष्ट और स्वाभाविक जागरूकता का अनुभव होता है। ध्यान की शान्ति से दिमाग और शरीर पर पडे प्रभाव के अच्छे परिणाम हैं।

श्रेष्ठ परिणामों के लिए, ध्यान दैनिक २० मिनट के लिये एक या दो बार करें। हो सके तो ध्यान सुबह और शाम को करें। परिणामों का आकलन करने से पहले कम से कम ३० दिनों तक ध्यान करें। यदि आप ध्यान को अपनी परमेश्वर की दैनिक धार्मिक प्रथा के साथ करना चाहते हैं तो आप अपनी दैनिक धार्मिक प्रथा करो जब तक मन शांतिपूर्ण हो जाए और ईशवर का अनुभव हो जाए। हो सकता है कि ध्यान स्वाभाविक रूप से लग जाए। अगर ध्यान न लगे तो अपने चुने हुए शब्द का प्रयोग करें ताकि ध्यान केंन्द्र अन्दर रहे।

जब आप ध्यान के अभ्यास में प्रवीणता हासिल कर लेते हैं, तब ध्यान के समय को बडा सकते हो। शांति से मन में अनंत का विचार करें।

जब दैनिक गतिविधियों और संबंधों में हों तो अपने मन को शांत बनाए रखें। उत्साह और आशावाद रहें। भावनाऐं स्थिर रखें। कार्य और आराम में संतुलन बनाए। नियमित रूप से व्यायाम करें और एक पोषक भोजन खायें। स्वास्थ्य प्रयोजनों के लिए और प्रकृति, एक शाकाहारी आहार सबसे अच्छा है करने के लिए तरह किया जाना है। अपने सभी विचारों, मूड, संबंध और कार्य पूर्ण और उचित हों। नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास और प्रकृति एवम अन्य लोगों के साथ ठीक सम्भन्द शान्ति और सफलताप देते हैं।