क्रिया योग दर्शन शास्त्र और जीवन शैली प्रथाऐं

Kriya Yoga Initiation at Center for Spiritual Awareness

संस्कृत के शब्द 'क्रिया' का मतलब 'करना' है। इसलिये क्रिया योग का मतलब है कि वे प्रणालियां जिनके द्वारा सेहद, आध्यात्मिक विकास, या एकता-चेतना का अनुभव हो। पतांजली के २००० साल पुराने 'योग सूत्र' में लिखा है कि क्रिया योग का मतलब है कि मन और इन्द्रियों को वश मे रखना, स्वयं विल्क्षेषण, स्वाध्याय, ध्यान का अभ्यास, और अहंकार की भावना का ईशवर प्राप्ति के लिये त्याग।

क्रिया योग आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म जागृति के लिये एक एकाग्रता का रास्ता है। इससे पूणृ ईशवरीय ज्ञान होता है। इसमे योग की सभी प्रणालियों की सबसे प्राभावी प्राक्रियां भी शामिल हैं, और इसका जोर स्वास्थ्यकर और ठीक प्रकार से रहने और चेतनावस्था के अनुभव करने पर है। इसका उध्येश है कि अभ्यासी अपनी आत्मचेतना का ज्ञान करे। इसको अनुभव करने के लिये अपनी सच प्रक्रिति का ज्ञान, ठीक सोचना, भावनात्मक संकुलन, शारीरिक स्वास्थ्य, उध्येशपू्र्ण जीवन, और ध्यान के अभ्यास की आवशयकता है।

स्वाभाविक अन्द्रूनी गुणों को प्रद्रशित करने और चेतन अवस्था का अनुभव करने के लिये, विशेष ध्यान के तरीकों को सिखाया जाता है, और इनके अभ्यास के किये कहा जाता है। शुरुआत में ध्यान के अभ्यासियों को आमतौर पर एक सरल शब्द या ध्वनि (मंत्र) के उपयोग के बारे मे सीखाया जाता है ताकि वे ध्यान केंद्रित कर सकें। प्रारंभिक अध्ययन और अभ्यास के कुछ समय बाद, उन्नत ध्यान क्रियायों की दीक्षा के लिये अनुरोध किया जा सकता है।

यध्पि क्रिया योग की जानकारी और इसका इस्तेमाल कई शत्बादियों से चल रहा है, यह राय यूजिन डेवीस के गुरु परमहंस योगान्द जी थे जिन्होने पश्चिम में पहली बार योग पर बल दिया। योगान्दं जी १९२० में भारत से अमेरिका आये थे, और उन्होंने बहुत लैक्चर दिये, किताबें लिखी, और १९५२ में अपने अन्त समय से पहले, ३२ वर्ष तक शिष्यों को प्रशिक्षित किया। उनकी सब से अच्छी पुस्तक 'एक योगी की कथामृत' अब कई भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।